ब्लॉगसेतु

Barun Sakhajee
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Barun Sakhajee
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Hari Mohan Gupta
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 लघु कथा दीपाली की नियुक्ति सहायक अध्यापिका के रूप में नगर में हुई थी |उसका अध्यापन कक्ष दूसरी मन्जिल पर था और वह सीढियाँ चढ़ रही थी किउसकी द्रष्टि नीचे की ओर गई, ऐक पोलियो ग्रस्त बालक वाकर की सहायता से सीढियाँ चढ़ रहा है तो उसने सोचा वह गिर न पड़े इसलिये वह सीढि...
JITENDRA PARASHAR
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कि जब ख्वाहिशें मेरी नींदे उड़ाती हैंकि जब ह&#238...
Lokendra Singh
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अमरकंटक दर्शन - 7अमरकंटक के जंगल में, ऊंचे पहाड़ पर एक चट्टान ऐसी है, जिसमें 12 महीने पानी रहता है। चट्टान में एक छेद है, उसमें हाथ डाल कर अंजुली भर जल निकाल सकते हैं। इस आश्चर्यजनक चट्टान को भृगु का कमंडल कहा जाता है। मेरे मित्र अशोक मरावी और मुकेश ने जब मुझे यह ब...
अजय  कुमार झा
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#खड़ीखबर : हमारे पूर्वजों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए था : आजम खान लेकिन मैं तो पाकिस्तान में ही हूँ :हाफ़िज़ सईद फ्रॉम पाकिस्तान#खड़ीखबर : टमाटर पहुंचा अस्सी नब्बे रुपए किलो 100 पर पहुँचने पर दिल्ली विश्वविद्यालय की कटऑफ लिस्ट में हो सकता है शामिल  #खड़ीखबर : मा...
Harsh Wardhan  Jog
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मध्य प्रदेश का एक छोटा सा शहर खजुराहो अपने सुंदर मंदिरों के कारण विश्व प्रसिद्द है. ये सभी मंदिर विश्व धरोहर - World Heritage Site की सूची में आते हैं. भोपाल से खजुराहो की दूरी 380 किमी है और झांसी से 175 किमी. खजुराहो हवाई जहाज, रेल या सड़क से आसानी से पहुंचा...
 पोस्ट लेवल : Sketches around Travel
BAL SAJAG
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" नोटबन्दी "लोग हो गए हैं बेहाल, पुराने नोटों का हुआ हलाल | अमीर हो गए बेमिशाल ,गरीब हो गए लालम - लाल | क्योंकि पुराने नोटों के हो गए जमाना, लोग एक - दूजे के हुए परमाना | मोदी ने किया पुराने नोटों का खात्मा, काले  धंदे वालों की शा...
 पोस्ट लेवल : अशोक . बाल सजग
BAL SAJAG
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" छोटी सी चिड़िया "छोटी सी चिड़िया चहक रही थी, मेरे खिड़की के पास | मैं देख रहा था उस चिड़िया को, जो उड़ रही थी मेरे खिड़की के पास | अपने सहेलियों को बुला रही थी,लगता वो मेरे नींद को जगा रही थी | जब वह आई मेरे पास,मैंने उसे बताई एक बात खास | चली जा अपनी सहेली के पास,मत ब...
BAL SAJAG
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" काले बादल "देखो ये काले बादल,भरा जैसे मटके में पानी | कहाँ से यह आता है,फूट - फूट कर बरस जाता है | कोई इसे कुछ कहते नहीं,बिन बादल मोर चहकते नहीं | हरदम अपनी मर्जी का करता,ये किसी की मर्जी न सुनता | करता है अपनी ही मनमानी, भरा जैसे मटके में पानी | कवि : अखिलेश कु...