ब्लॉगसेतु

ज्योति  देहलीवाल
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जो आहार गलत संयोग (combination), गलत मात्रा (dose), गलत समय (time) पे और ऋतु के प्रतिकूल खाया जाता हैं उसे विरुद्ध आहार (Incompatible food) कहते हैं। विरुद्ध आहार एक तरह का जहर हैं, जिसे जाने-अनजाने हम सेवन करते आ रहे हैं। विरुद्ध आहार ही कई गंभीर बीमारियों की असली...
उन्मुक्त हिन्दी
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इस चिट्ठी में, अपने पिता, इमरजेन्सी  और नैनी सेन्ट्रल जेल की यादें।नैनी सेन्ट्रेल जेल का दरवाजा - जहां से हमें अन्दर ले जाया जाता था कुछ दिनो पहले, मुझे नैनी इलाहाबाद में स्थित, एक विश्वविद्यालय के दिक्षांत समारोह में शिरकत करने का मौका मिला। रास्ते में एक ऊंच...
 पोस्ट लेवल : दर्शन
Rinki Raut
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एक गोरैया ने आवाज़ लगाईइस कंक्रीट के जंगल में नहींगाँव में ज़िन्दगी आज भी है समाईआज भी चिडियों के झुंड दिखते हैशाम में गोधूली उड़ती हैबरगत के पेड़ के नीचेज़िंदगी ले अंगड़ाईआकाशवाणी के बोल देती है सुनाईसुबहे की बेला में लिपा हुआ चूल्हा और अगनबिना पढाई के बोझ तले दबा बचपनद...
kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादन--------किसने मेरी पलकों पे तितलियों के पर रखेआज अपनी आहट भी देर तक सुनाई दी- बशीर बद्रदिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है किस की आहट सुनता हूँ वीराने में -गुलज़ार कालजयी रचना ज़नाब मिर्जा गालिबइस दिल को किसी की आहट की आस रहती है, निगाह को...
 पोस्ट लेवल : 1585 आहट
Yashoda Agrawal
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"गुम हो कहीं ?" पूछा किसी नेक्या पता है तुझे अपना पता?क्यों कोई नहीं जानता मुझे इस दुनिया मेंक्या कोई नहीं है मेरा अपना!!भूल गई हूँ अपना पता,रोज़ मेरा पता बदलता है।पहले माँ का घर पे थी टेहरीवही था मेरा पता तब।तब आयी मेरे साथी की बारीसफ़र था कोई जिसमेंउसका साथ था ज़रूर...
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--राजनीति के जाल में, फँसे राम-रहमान।मन्दिर-मस्जिद का नहीं, पथ लगता आसान।।--न्यायालय के न्याय पर, क्यों उठ रहे सवाल।अरजी पुनर्विचार की, है अब नया बवाल।।--हिन्दू-मुस्लिम ने किया, निर्णय था स्वीकार।लेकिन कुछ शातिर अभी, झगड़े को तैयार।।--साफ विरासत का...
 पोस्ट लेवल : दोहे फूटनीति का रंग
अनीता सैनी
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सादर अभिवादन।               'शिक्षा सबके लिये' का मिशन अब सरकार की मंशा से अलग हो चुका है। शिक्षा को कारोबार में बदलने और इसे सिर्फ़ सक्षम वर्ग के लिये सुनिश्चित करने के लिये अब सरकार की नीतियों में चालाकीभरी दूरदृष्टि अब...
पम्मी सिंह
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समाज के विभिन्न बुद्धिजीवी वर्गों के विचारों को संलग्न  करती पत्रिका ' भाषा सहोदरी ' में शामिल मेरी आलेख.. विषय : भाषा और राजनीतिभाषा और राजनीति के  आरंभिक विकास की रेखाएं, शून्य से प्रारंभ हो एक विशेष लक्ष्य को प्राप्त करती है। भाषा के साथ राजनीति क...
kumarendra singh sengar
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बीते दिनों से छुटकारा पाना आसान नहीं होता है. उन दिनों की बातें, उनकी यादें किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाती हैं. ये यादें कभी हँसाती हैं तो कभी रुलाती हैं. दिल-दिमाग खूब कोशिश करें कि पुरानी बातों को याद न किया जाये मगर कोई न कोई घटना ऐसी हो ही जाती है कि इन या...
संजीव तिवारी
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 पोस्ट लेवल : TOP NEWS